मीडिया पर मंदी की भरी मार है..सभी मीडिया संस्थानों से लोगों की छटनी की जा रही है.चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या एलेक्टोनिक मीडिया.मंदी के नाम पर जन्हा लोगों की छटनी की जा रही है वन्ही कोस्ट कटिंग के नाम पर लोगों की सलारी में भी भरी कटौती की जा रही है.काम के घंटे बढाये जा रहे हैं.छूती कम की जा रही है।
मैं इस बात को किसी भी तरह से नही समझ पा रहा हूँ की मीडिया पर मंदी कैसे असर डाल रही है.मीडिया के आर्थिक श्रोत देखें जाए तो उनमे किसी भी तरह की कमी नही दिखती .चुनाव के दौरान सभी मीडिया संस्थानों की कमाई बढ़ ही गई है.फ़िर भी अगर कहा जाय की विज्ञापन कम हो गए हैं तो कोई मुझे ये बताने का कस्ट करेगा कि किस चैनल पर विज्ञापन कम हो गए हैं.किस अखबार के पन्ने विज्ञापन के अभाव से ग्रस्त हो गए हैं.
रविवार, 12 अप्रैल 2009
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