
मुंबई में आतंक और मीडिया का नाटक
मुंबई पर आतंकी हमले के बाद हमें निम्न बिन्दुओ पर विचार करने की जरुरत है........
१-मीडिया आतंकियो के साथ थी या देश के साथ ?
२- मीडिया ने भय ,आतंक , कमांडो कारवाई और बिखरी लाशों से टीआरपी बढ़ा कर कितनी कमाई की ?
३-देश की बड़ी एजेंसी एटी एस के चीफ का इतनी आसानी से आतंकियों का शिकार हो जाना कैमरे के सामने अति आत्मविश्वास का परिणाम था या बहादुरी ?
४-आतंकियो का यह दुस्साहस क्या यह नही दर्शाता की पूरा देश उनकी गिरफ्त में है ?
मुंबई पर आतंकी हमले के बाद हमें निम्न बिन्दुओ पर विचार करने की जरुरत है........
१-मीडिया आतंकियो के साथ थी या देश के साथ ?
२- मीडिया ने भय ,आतंक , कमांडो कारवाई और बिखरी लाशों से टीआरपी बढ़ा कर कितनी कमाई की ?
३-देश की बड़ी एजेंसी एटी एस के चीफ का इतनी आसानी से आतंकियों का शिकार हो जाना कैमरे के सामने अति आत्मविश्वास का परिणाम था या बहादुरी ?
४-आतंकियो का यह दुस्साहस क्या यह नही दर्शाता की पूरा देश उनकी गिरफ्त में है ?
